महात्मा बुद्ध की सीख आप क्या लेना पसंद करेंगे ? उदासी या मुस्कान

महात्मा बुद्ध की सीख

एक गांव में एक महिला का एक ही बेटा था। उस महीला का वह बेटा मर जाता हैं। तो वह रोती – बिलखती वह महात्मा बुद्ध के पास जाती हैं। और उनके पैरों पर गिरकर रोने लगती हैं। और रोते हुए बोली- महत्माजी , आप किसी तरह मेरे पुत्र को जीवित कर दीजिए।

‘ महत्मा बुद्ध ने उसे हिम्मत देते हुए कहा , ‘ तुम शोक न करो । बुद्ध ने उस महिला को सत्य बताने के लिए हिम्मत देते हुए कहा , मैं तुम्हारे बेटे को जीवित कर दूंगा लेकिन हमारी एक शर्त है की तुम एक भीखारी के रूप में किसी गांव से कुछ भिक्षा मांग लाओ जहाँ किसी ब्यक्ति की कभी मृत्यु न हुई हो ।

उस महिला को कुछ तसल्ली हुई और वह दौड़ते हुए गाँव कि ओर चल पड़ी

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अब वह महीला ऐसा घर खोजने लग गई। जहां किसी की मृत्यु न हुई हो। वह बहुत ढूंढा लेकिन ऐसा कोई घर उसे नहीं मिला। जहां भिक्षा मांग सके। वह निराश होकर महात्मा बुद्ध के पास लौट गई। और महात्मा बुद्ध से बोली- महात्मा ऐसा कोई घर नहीं जहां मृत्यु न हुई हो।

तब बुद्ध बोले , ‘ यह संसार – चक्र है । यहाँ जो भी आता है। उसे एक न एक दिन अवश्य ही जाना पड़ता है । तुम्हें इस दुःख को धैर्यता से सहन करना चाहिए । ‘

तब महिला को बुद्ध के वचन समझ आये और उस महिला ने फिर बुद्ध से संन्यास लिया और मोक्ष की राह पर चलने लगी ।

आप क्या लेना पसंद करेंगे ? उदासी या मुस्कान

एक बार महात्मा बुद्ध किसी गाँव से गुजर रहे थे । उस गाँव के लोगों को महात्मा बुद्ध के बारे में गलत विचार थी। जिस कारण वे बुद्ध को अपना दुश्मन मानते थे । जब महात्मा बुद्ध गाँव से गुजरते थे। तो गाँव वालों ने बुद्ध को भला बुरा कहा करते थे, और बदुआएं भी देते थे।

लेकिन। महात्मा बुद्ध गाँव वालों की बातें शांति से सुनते रहते थे। और जब गाँव वाले महात्मा बुद्ध के बारे में कुछ उल्टा सीधा बोलते बोलते थक गए तो । बुद्ध ने कहा – ‘ अगर आप सभी की बातें समाप्त हो गयी हो तो। क्या मैं अपने रास्ते जाऊं ।

‘ बुद्ध की बाते सुनकर गाँव वालों को बहुत आश्चर्य हुआ । उनमें से एक व्यक्ति ने कहा – ‘ हमने तुम्हें इतना भला बुरा कहा क्या तुम्हें बुरा नहीं लगा। ‘

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बुद्ध ने कहा – ‘ जाओ मैं आप लोगों की गालियाँ को क्षमा कर देता हूं। आपके द्वारा गालियाँ देने से क्या होता है , जब तक मैं गालियाँ स्वीकार नहीं करता इसका कोई परिणाम नहीं होगा । कुछ दिन पहले एक व्यक्ति ने मुझे कुछ उपहार दिया था लेकिन मैंने उस उपहार को लेने से मना कर दिया तो वह व्यक्ति उपहार को वापस ले गया । जब मैं लूंगा ही नहीं तो कोई मुझे कैसे दे पाएगा ।

‘ बुद्ध ने बड़ी धैर्य से कहा – ‘ अगर मैंने उपहार नहीं लिया तो उपहार देने वाले व्यक्ति ने उस उपहार को क्या किया होगा । ‘

उसी भीड़ में से किसी ने कहा – ‘ उस उपहार को व्यक्ति ने अपने पास ही रख लिया होगा ।

‘ महात्मा बुद्ध ने कहा – ‘ मुझे आप सब पर बड़ी दया आती है क्योंकि मैं आपकी इन गालियों को लेने में असमर्थ हूँ और इसलिए आपकी यह गालियाँ आपके पास ही रह गयी है । ‘

दोस्तों, आपको कोई फर्क नहीं पड़ता कि पीछे कौन भोंक रहा है अपने रास्ते चलते रहिए और अपने रास्ते बनाते रहिए भोकने वाले तो जिंदगी भर भोकेगें । एक हिंदी में कहावत है। हाथी चले बाजार तों कुत्ता भोके हजार । धन्यवाद

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