एक बार अवश्य पढ़ें, वचन के पक्के हिन्दी कहानी,Motivational story

वचन के पक्के हिन्दी कहानी

एक प्राचीन काल की बात है । एक राजा के छः बेटे थे । उन सब बेटों की शादी एक साथ करने के लिए राजा ने दूर देश के राजा को छ : लड़कियों से रिश्ता पक्का कर दिया । अब जब बारात के जाने का समय आया तो राजा ने भारी बारात , घोड़े , हाथी , पैदल , रथ , बैल गाड़ियों में भरकर ले जाने की तैयारी कर ली । लम्बा रास्ता कम से कम छ : दिन का था बाराती भयंकर जंगलों में से गुजर रहे थे । रात होती तो सारे बाराती जंगल में डेरा डालकर बैठ जाते । वहीं पर खाते – पीते वहीं पर सौ जाते । एक दिन जैसे ही बारात रास्ते में रूकी तो बारातियों के पास पीने का पानी समाप्त हो गया । पानी के बिना तो खाना भी नहीं खाया जा सकता था । प्यास के मारे सबका बुरा हाल हो रहा था । ” इस जंगल में पानी मिले भी तो कहाँ ? ”

सब लोग पानी की तलाश में निकले । राजा के छः लड़के भी इसी काम में लग गए । काफी खोज के पश्चात् उन्हें एक कुँआ मिला । जिसके अंदर पानी देखकर उनका मन खुश हो गया । किन्तु जैसे ही वे लोग पानी लेने लगे तो अन्दर से एक काले नाग की फुफकार सुनी । उस फुफकार को सुनकर सब लोग डर गए कि यह नाग हमें नहीं छोड़ेगा काले नाग की फुफकार से तो हर मानव डर जाते है । तब राजा ने आगे बढ़कर दोनों हाथ जोड़कर नाग देव से प्रार्थना की कि ” हे नाग देव ! हम सब लोग प्यास से मरे जा रहे हैं । आप हम पर कृपा करो । हमें पानी पीने के लिए लेने दो । ” तभी अंदर से नाग देवता बोले –

“ हे राजन् ! मैं आपको एक शर्त पर पानी दे सकता हूँ । ” ” कौन सी शर्त है महाराज ? ” ” देखो राजन् ! आपके छः लड़के हैं उनमें से एक लड़का मेरे हवाले कर जाओ । बस इसके बदले में मैं आप सब के लिए पानी का प्रबन्ध कर दूंगा । ‘ राजा नागदेव की बात सुनकर गहरी सोच में पड़ गए । छः लड़कों की शादी होने जा रही थी , उनमें से किसी एक को भी नाग देवता के हवाले नहीं किया जा सकता । यदि वे ऐसा करेंगे तो बाकी लड़कों की शादी भी रुक जाएगी । काफी देर सोच – विचार के पश्चात् राजा ने नाग देवता से हाथ जोड़कर प्रार्थना की कि- “ हे नागदेव ! आपने जो कुछ ”

माँगा है उसे हम आपको अवश्य देंगे , परन्तु हम आपसे प्रार्थना करते हैं कि इन बच्चों की शादी होने वाली है । अब हम जैसे ही शादी करके लौटेंगे तो एक लड़का आपकी सेवा में छोड़ देंगे । बस आप हम पर इतनी कृपा करे । हम पर विश्वास करो । ” “ यदि आपकी यही इच्छा है तो आपको पानी देता हूँ । परन्तु आपको अपने वचन का पालन करना ही होगा नहीं तो जो भी विनाश होगा उसकी जिम्मेवारी आपके सिर पर ही होगी । ” “ ठीक है नागदेव । राजा अपने वचनों के बहुत पक्के होते हैं । हम तो केवल इतना जानते हैं कि प्राण जाए पर

वचन न जाए । ” नाग देवता ने सब लोगों को शीतल जल पीने के लिए दिया । सबको बड़ा आनन्द आया , सब खुशी से झूम उठे । अब एक बार फिर से बारात चलने लगी थी । सात दिन लम्बी यात्रा के पश्चात् उस राजा के शहर में पहुँचे जिसमें उसकी छः राजकुमारियों की शादी होने वाली थी । यह शादियाँ खूब धूम – धाम से हुई । पूरे शहर में खुशी का वातावरण बना हुआ था । ढोल बज रहे थे , पूरे शहर को नई दुल्हन की भांति सजाया गया था । बच्चे , बूढ़े सबके सब लोग नाच रहे थे । बारात को विदा करके वापसी पर राजा ने अपना दिया वचन पूरा करते हुए नाग देवता के पास आकर उसे प्रणाम किया और अपने बेटों से कहा-

” आपमें से किसी एक को नागराज को अर्पण होना ही है बोलो कौन आगे आने को तैयार है ? ” सबके सब भाई एक दूसरे का मुँह देखने लगे शायद मृत्यु से हर एक को डर लगता था । कोई भी नाग देव के पास जाने को तैयार नहीं था । ” क्यों बेटों ! क्या आपमें से कोई एक भी अपने पिता के दिए वचन को निभाने के लिए तैयार नहीं …. क्या राजा अपने जीवन में पहली बार झूठा पड़ जाएगा । ” तभी सबसे छोटा बेटा वीर सिंह आगे आया उसने अपनी छाती ठोक कर कहा- ” नहीं पिताजी ! जब तक वीर सिंह जीवित है , आपका दिया वचन झूठा नहीं पड़ सकता । ”

” शाबाश बेटा ! तुमने अपने पिता की लाज रख ली । अपने पिता के लिए तुम मौत के मुँह में जाने को तैयार हो गए हो मेरे लिए यही गर्व की बात है । ” तभी वीर सिंह ने कुँए के अंदर छलांग लगा दी । वहाँ पर नाग देव पहले से ही मुंह फैलाए तैयार बैठा था । जैसे ही वह वीर सिंह को अपना ग्रास बनाने लगा तो वीर सिंह ने कहा- “ मैं तो शिवजी का भक्त हूँ महाराज ! मुझे खाने से पूर्व मुझे इतना समय तो दीजिए कि मैं शिवजी की उपासना कर सकूँ । ” ” क्या तुम शिवजी के उपावास हो । ”

‘ हाँ , नागदेव ! मैं तो बचपन से ही शिवजी की उपासना करता आ रहा हूँ । “ यदि तुम शिव भक्त हो तो मैं तुम्हें नहीं खा सकता । अब मैं तुम्हें एक राजकन्या बताता हूँ , तुम जाकर उससे विवाह करके आओ तो तुम्हें बहुत धन प्राप्त होगा । ” आप जो भी आज्ञा देंगे मैं उसका पालन करूँगा । यह कहकर वीर सिंह ने नागदेव के चरणों को छूकर आशीर्वाद प्राप्त किया । तब नागदेवता ने उसे आशीर्वाद देते हुए कहा- ” देखो बेटा , तुम्हें रास्ते में दो मानव मिलेंगे उन्हें भी अपने साथ लेकर आगे बढ़ते रहना । ” ” ठीक है नागदेवता । ऐसा ही होगा ।

” नागदेवता ने अपनी शक्ति से अपना कद इतना लम्बा किया कि वीर सिंह उसके सहारे कुँए से बाहर आ गया । फिर तेजी से जंगल में चलने लगा । उसने देखा कि सब लोग उसे छोड़कर जा चुके थें। रास्ते में वीर सिंह ने एक शेर को तड़पते पड़े देखा । पहले तो वह उससे डर गया फिर उसे इस प्रकार तड़पते देखकर दया भी आई । उसने शेर के पास जाकर कहा- “ महाराज ! आपको क्या कष्ट है ? ” ” मेरे पाँव में बहुत भारी काँटा चुभ गया है , आप चाहें तो मुझ को बचा सकते हैं । ” ” यदि मैंने आपको बचा लियो तो इसका क्या भरोसा कि आप मुझे खाओगे नहीं । ” ” मुझ पर विश्वास करो मित्र ! मैं जंगल का राजा हूँ । ।

राजा का वचन बहुत बड़ी बात होती है । ” वीर सिंह ने डरते – डरते शेर के पाँव से काँटा निकाल दिया । शेर को बहुत आराम मिला तो उसने वीर सिंह को अपनी मूंछ के पाँच बाल दिए । ” मेरे मित्र ! जब भी जीवन में कभी किसी संकट में फंस जाओ तो इनमें से किसी एक बाल को पत्थर पर रगड़ देना । मैं उसी समय तुम्हारी सहायता के लिए पहुँच जाऊँगा । ” शेर को जंगल में अपना मित्र बनाकर वीर सिंह आगे चल दिया तो उसके आगे एक छोटे से कद के आदमी को बड़ा सा वृक्ष सिर पर रखकर ले जाते हुए देखा तो आश्र्चय से पूछा भैया !

आपका नाम क्या है और आप अपने सिर पर इतना बड़ा वृक्ष क्यों लादे लिए जा रहे हो ? ” ” मेरा नाम मानव है । इस वृक्ष की मैं दातुन बनाकर करूँगा । ” ” मानव ! क्या आप मेरे से मित्रता करोगे ? ” ” हाँ ….. हाँ .. .क्यों नहीं । ” थोड़ी दूर जाने पर एक नदी मिली तो वीर सिंह पानी में फंसी चींटियों को बाहर निकालने लगा । उसने मानव से कहा- ” देखो उस पार कोई आदमी नजर आ रहा है या नहीं । ” मानव ने पहाड़ी पर चढ़कर देखा तो उसे एक आदमी नजर आया । जिसकी नाक नहीं थी । वह आदमी इतना पेशाब कर रहा था कि उससे नदिया बहने लगी थी । छोटू मानव उस नकटे के पास गया और उससे जाकर

बोला- ” अरे पेशाब करना बंद करो । हमारे राजा वीर सिंह बेचारे चींटियों को बाहर निकालकर अपने हाथ गंदे कर रहे हैं। उस नकटे ने उसी समय पेशाब करना बंद कर दिया । नदिया सूख गई । नकटा भी अब उनका मित्र बन गया था । वह भी वीर सिंह और मानव के साथ – साथ चलने लगा । फिर तीनों चलते – चलते उस राजा के देश में पहुंच गए । जिसके बारे में नागदेवता ने बताया था । उन्होंने वहाँ पहुंचते ही सबसे पहले राजा को संदेश पहुँचाया कि हम आपकी पुत्री से विवाह करना चाहते हैं । वहाँ के राजा ने वीर सिंह को अपने पास बुलाया और उससे बोला कि ” यदि आप मेरी बेटी से शादी करना चाहते हो तो आपको पहले जीवित चिता में जलना होगा ।

बोलो यह मंजूर है ? ” चिता को सजाकर वीर सिंह को उसमें बैठा दिया गया । जैसे ही वह चिता में जलने लगा तो मानव ने नकटे से कहा- ” अरे देख क्या रहे हो ! अपना मित्र चिता में जल रहा है। उसी समय नकटे ने पेशाब करना शुरू किया तो चिता की आग शांत हो गई । ” अब तो आप मेरी शादी कर देंगे न ? ” वीर सिंह ने पूछा । नहीं , अभी आपके लिए एक और परीक्षा बाकी है । ” कौन सी ? ”

देखो हम एक बोरी सरसों को रेत में मिला देंगे । उस सरसों को तुम चुन – चुनकर तुम रेत से अलग करोगे । मैं । अभी सरसों को रेत में मिलाकर तुम्हारे आगे डाल रहा हूँ । यदि तुम इस काम में सफल हो गए तो राजकुमारी भी तुम्हारी और हमारा पूरा राज्य भी तुम्हारा होगा । ” अब क्या होगा ? ” वीर सिंह बेचारा आगे पड़ी सरसों और रेत देखकर सोच में पड़ गया । अब करे तो क्या करे , हार मान नहीं सकता था। एक बोरी सरसों को रेत में से बीन कर अलग करना कोई खेल नहीं । यह तो बहुत लम्बा काम है । ” वर्षों का काम । ” वीर सिंह बैठा इस बारे में सोच रहा था उसे इस प्रकार चिंता में डूबे देखकर उन चींटियों की रानी ने अपनी प्रजा चींटियों से कहा- ” देखो ! जिस आदमी ने हम लोगों की जान बचाई थी हमें बहते पानी में से बाहर निकाला आज उसको हमारी सहायता की जरूरत है ।

उसे सरसों के दानों को चुन – चुनकर बाहर निकालना है । यह काम उसके बस का नहीं है । हम इसे यथाशीघ्र कर देंगे । उसके एहसान का बदला चुकाने का समय आ गया है । चलो ! सब चलो और फिर वीर सिंह ने जो दृश्य देखा उसे तो सपने में भी आशा नहीं थी । चींटियाँ बड़े मजे से सरसों को चुन – चुनकर रेत में से निकाल रही थी । थोड़े समय में इतना कठिन काम पूरा हो गया । राजा ने शाम के समय आकर यह सब दृश्य देखा तो वह स्वयं हैरान था कि यह असंभव काम संभव कैसे हो गया , उसे क्या पता

था कि ” कर भला सो हो भला । ” राजा वीर सिंह के इस कार्य से बहुत प्रसन्न हुआ । उसने अपनी कन्या का विवाह बड़ी धूम – धाम के साथ वीर सिंह से कर अपना पूरा राज्य उन्हें देकर गद्दी पर बैठाया और स्वयं जंगलों में चले गये । मगध देश का राजा बनकर वीर सिंह , एक बार फिर नागदेवता के पास उनका धन्यवाद करने गया तब नागदेवता ने उसकी इस सफलता पर बधाई दी। आशीर्वाद देते हुए कहा- ” बेटा ! जो लोग अपने माता – पिता की आज्ञा का पालन करते हैं उन्हें संसार भर के आनन्द प्राप्त होते हैं ।

• Motivational, Hindi Shayari

• नाई और भगवान बहुत एक अच्छी कहानी,Barber and god very good story

यदि आपके पास कोई हिंदी कहानी या आपकी Motivational सोच जो आप शेयर करना चाहते हैं जो आपको लगता है कि इसे शेयर करना चाहिए। तो इस Website पर आप अपनी एक फोटो के साथ शेयर कर सकते हैं। E-mail करें। id है- ekahaniyan1234@gmail.com पसंद आने पर आपके नाम और आपकी फोटो के साथ प्रकाशित की जाएगी।

धन्यवाद

Educationhindime Share

Leave a Comment

error: Content is protected !!